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Sunday, 7 April 2019

सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता! - कहानी निकिता ढौंडियाल की।

एक तरफा संवाद



इस बार मैं थोड़ा जल्दी घर आया। पिछली बार दिसंबर में आया था तब मां और पत्नी से अप्रैल में घर आकर शादी की पहली सालगिरह का जश्न मनाने की इच्छा बताई थी। लेकिन फरवरी में ही आना हो गया। और अब वापिस ना आना होगा ना दुबारा जाना होगा। अब मैं घर पर हूं भी और नहीं भी।

मैं शहीद मेजर विभूति ढौंडियाल हूं । क्षमा करें, मैं उनकी रूह हूं। अब हम अलग हो गए हैं। उनका शरीर जहां मैं गर्व से रहती थी, मेरे सामने पड़ा है।

देख नहीं पा रही मैं ये हालत। मां, निकिता, रिश्तेदार और बाकी सब। सब दुखी हैं। ये देखकर मुझे भी दुःख हो रहा है। मत रोइए प्लीज़।



मां बोल रही थी मेरा शरीर आने से कुछ देर पहले, की उन्हें क्यों सब घर, पड़ोस वाले इधर उधर परेशान से लग रहे हैं। क्या मेरे बेटे की कोई अशुभ खबर है। हे भगवान, मेरे बेटे की रक्षा करना। अभी तो वो दिसंबर में कुछ वक़्त बिता कर, वापिस आने का कह कर गया था। मुझे दिल की बीमारी है, क्या इसीलिए ये सब मुझे आखिरी में बताने वाले है? हे ऊपरवाले, मेरे दिल को तसल्ली दे।

मेरी मां कह रही थी खुद ही में कि उन्हें सबसे आखिर में बतायी गयी उनके बेटे की शहादत की खबर। मां के शब्दों में "मैंने ही इस वीर को जया है, मैंने ही इसमें ये वीरता और साहस भरा है कि ये सेना में भी जा सके, और सब लोग मुझे ही कमजोर मान रहें हैं। माना कि दिल की बीमारी है लेकिन एक जवान की मां का दिल इतना भी कमजोर नहीं होता। खैर ये मेरे प्यार करने वालों का एक तरीका है और गलत भी नहीं है।"
हे मां, कोटि प्रणाम है तुझे तेरे बेटे की तरफ से।

सेना के साथी भी श्रद्धांजलि दे रहें हैं। विश्वास है कि वो भी ऐसी ही शहादत चाहते होंगे एक साधारण मौत की बजाय। नागरिक अपनी जिंदगी असाधारण चाहतें हैं और सेना के जवान अपनी मौत असाधारण चाहतें हैं। अद्भुत! गर्व है।

मेरी पत्नी निकिता कौल ढोंढियाल गुमशुम खड़ी है। मेरे मृत शरीर की तरफ देखे जा रही है। और मैं यानी कि उसके पति की रूह उसे देखे जा रही है। जाने क्या आ रहा होगा उसके मन में।
प्रेमविवाह हुआ था हमारा। पिछली अप्रैल में। वापिस अप्रैल आने वाला है। पहली सालगिरह साथ मनाने का वादा पूरा नहीं कर पाया। अफ़सोस!

मैं उसके दृढ़ व्यक्तित्व का कायल हो गया था। जैसे देखिए जिसके मां बाप को कश्मीरी पंडितो के साथ कश्मीर से अपना घर छोड़ना पड़ा था, जिसने अपना बचपन कश्मीर से दूर, कश्मीर की जन्नत वाली वादियां, वहां के किस्से और मौत वाली दुश्मनी सुनते सुनते बिताया; उसने प्यार करके शादी रचाई तो उसी जवान से जिसको कश्मीर में ही ड्यूटी करनी थी। निकिता, तू कहां कम है मुझसे वीरता में। देश मुझे तो शायद याद रखे तो रखे लेकिन तुझे याद रखे तो बेहतर होगा। तू दुर्गा का ही एक रूप है।



वो मेरे मृत शरीर को बार बार हाथों से चूम रही है। सुन पा रहीं हूं कि वो बार बार कह रही है कि वो मुझसे प्यार करती है। मैं भी तुमसे प्यार करता हूं, काश ऐसा मैं उसे अभी बोल पाता।
वो कुछ बोल रही है मुझे सबके सामने। जरा सुनता हूं।
"मुझे तुम पर गर्व है। लेकिन तुमने मुझसे झूठ बोला कि तुम मुझसे सबसे ज्यादा प्यार करते हो। वास्तव में तुम इस देश को ज्यादा प्यार करते हो। मुझे इस बात से ईर्ष्या है हालांकि मैं ये बता नहीं सकती।"
हालांकि अब मेरी बात उस तक नहीं पहुंच सकती लेकिन हां निकिता, तुमसे बेइंतेहा प्यार है मुझे, लेकिन देश से प्यार के लिए बेइंतेहा शब्द छोटा है। माफ़ करना मैंने तुमसे ये झूठ बोला लेकिन विश्वास है कि यह माफी के काबिल है।

"हम सब आपसे प्यार करते हैं विभू। जिस तरह से आपने हर एक से प्यार किया। आपने अपनी जिंदगी लोगों के लिए कुर्बान कर दी। यहां तक कि जो लोग आपसे कभी मिले भी नहीं, फिर भी तुमने उनके लिए अपनी जिंदगी कुर्बान करने की ठान ली। तुम बहुत बहादुर इंसान हो। और मैं बहुत गौरव महसूस कर रही हूं कि मैं आपकी पत्नी हूं। मैं.. मैं अपनी आखिरी सांस तक तुमसे प्यार करती रहूंगी विभू।"
ये तुम्हारा प्यार ही तो है जिसने ताकत दी है, तुमने जो सहायता दी है, जो समझदारी दिखाई है तभी मुझे देश के लिए जान देने से पहले कुछ सोचना नहीं पड़ा। मेरी कुर्बानी से ज्यादा में तुम्हारी कुर्बानी को देखकर गौरव महसूस करता हूं।

"तुमने मुझे स्थिर और एकाग्र रहने की अहमियत समझाई। मेरी ये जिंदगी तुम्हारी कर्जदार है और मुझे तुम पर बहुत गर्व है। ये तकलीफ़ देता है कि तुम जा रहे हो लेकिन मुझे पता है कि तुम हमेशा मेरे आस पास ही हो और रहोगे। हम फिर मिलेंगे ऐसी किसी दुनिया मे जहां आतंकवाद न हो और तुम्हें ऐसे जान ना गंवानी पड़े।"
और तुमने मुझे कर्तव्य से विमुख नहीं होने दिया कभी। मैं हमेशा तुम्हारे पास ही हूं। देखो ना अभी भी तुम्हारे पास हूं। तुम मुझे सुन नहीं पा रही हो। काश, ये संवाद एक तरफा ना होके दोनों तरफ से हो पाता। अगली दफा जब मिलेंगे तब जरूर ये सब मैं तुम्हें बताऊंगा।

"मैं सभी से ये अनुरोध करती हूं कि वो सहानुभूति रखने की बजाय हिम्मत रखें क्योंकि यह इंसान हम सभी। से बहुत ऊपर अपनी जगह रखता है। आइए ऐसे इंसान को सलामी देते है।
जय हिन्द। जय हिन्द। जय हिन्द।"
धन्य हूं मैं निकिता। जो तुम्हारे जैसी पत्नी मिली है। जो शहादत पर आंसू ना बहा कर जोश बढ़ा रही है। मां को भी तुम पर गर्व होगा। तुमने उनके बेटे की शहादत को अपनी वीरता से और भी सुहाना कर दिया है। दुनिया मुझे सलाम कर रही है लेकिन मेरा सलाम तुझे है।
जय हिन्द! जय हिन्द! जय हिन्द!


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इस शक्तिशाली और मार्मिक घटना को देखना चाहते हैं तो यहाँ देखें:
विस्तृत:
https://youtu.be/SWkAWjbZsfk
संक्षेप:
https://youtu.be/cUKKU8RJAaI

Monday, 18 September 2017

दुर्गा, आधी दुनिया और गालियाँ

क्यों?
आखिर क्यों?
क्यों सारी गालियों में केवल स्त्री की ही गरिमा को तार तार किया जाता है।

क्यों किसी की बुराई में उसकी माँ और बहन को बीच में लाया जाता है,
क्यों बातों ही बातों में तुम वो सब कर देते हो जिसके लिए तुम ही ने, हाँ तुम ही ने निर्भया candle march निकाला था।
तुमने ही उसकी निंदा फेसबुक पर की थी,
तुमने ही ऐसे इंसानो को सजा दिलवाने की मांग की थी।
लेकिन क्यों फिर आज तुम्हें फर्क नही पड़ता,
क्यों अपने ही दोस्त की बहन मां के साथ वही सब बातों में कर देते हो ।

एक ओर तुम माँ दुर्गा आदि शक्ति की आरती करते हो,
दूसरी ओर उसी नारी शक्ति को बातों से ही रौंद देते हो।
एक और अपनी माँ के लिए mothers day पर कविताएं लिखते हो,
ओर दूसरी तरफ दूसरों की माओं के साथ बातों में ही....।
एक और तुम women's day पर अच्छे अच्छे post paste करते हो, 
और दूसरी तरफ उन्हीं women की धज्जियाँ उड़ाते हो।
एक और अपनी बहन से राखी बंधवाते हो, सुरक्षा का वादा करते हो,
और दूसरे ही दिन तुम्हारा दोस्त तुम्हारी बहन के लिए कुछ भी कह जाता है और तुम हंस देते हो।

कैसे बेटे और भाई हो तुम..सोचो।

और तो और ये सब कोई और नहीं, तुम करते हो और दोस्त को करने देते हो। वाह।

क्यों तुम्हें शर्म नहीं आती..

शायद यह सोच कर की बोलने वाले का यह मतलब नहीं है।
तो फिर जब मतलब ही नहीं है तो कहना ही क्यों है।
और कुछ कहना ही है तो और भी बहुत शब्द है।

क्यों तुम्हें सामने वाले के सम्मान को ध्वस्त करने के लिए उसके बहन और माँ के सम्मान को कुचलना होता है।

ताज़्ज़ुब और मसखरा तो तब होता है
जब वो फेमिनिज्म की बातें करती है और दूसरी तरफ गालियां बकती है।
जब स्त्रीवाद (फेमिनिज्म) की बाते करने वालियाँ भी वही सब कहती है जिसके विरोध में अपनी दुकान चलाती है।
अपनी ही जाति के सम्मान को पैरों तले रौंद कर,
वो अपनी जाति की बराबरी की बाते करती है।
जो खुद अपनी आधी दुनिया के सम्मान की फिक्र नही रखते,
तो कोई और उस बारे में क्यों दिमाग लगाये।

गाली देना बिल्कुल भी cool नहीं है यार,
समझो कि किसी की इज़्ज़त को यूं तार तार करना cool हो ही नही सकता।

आधी दुनिया, जागो,
कब तक अपने ही तिरस्कार पर यूँ मौन बनी रहोगी,
और कब तक अपना ही तिरस्कार करती रहोगी।
ये तुम ही हो जो मिटा सकती हो इस बुराई को।

आज एक नहीं, हर नारी में शक्ति की जरूरत है।
शक्ति जो ऐसे अपमान करने वालों पर प्रहार कर सके,
शक्ति जो केवल मूर्तियों और किताबों से निकल कर हक़ीक़त में आये।
हे शक्ति, समझाओ अपने भाइयों को, कि किसी और की बहन की इज़्ज़त न उड़ाए।

यकीन रखो इसी तरह तुम्हरी गरिमा बनेगी जब कोई और बहन तुम्हारी सुरक्षा करेगी।
निर्भया के निर्भया बनने के बाद अफसोस करने से अच्छा अभी निर्भया बनो।

दुर्गा तुम्हारा ही एक रूप है।